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तल्लानागपुर फलासी में 25 वर्षों बाद नौ दिवसीय महा बन्याथ का भव्य आयोजन, तैयारियां जोरों पर

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ऊखीमठ।  फलासी तल्लानागपुर में स्थित भगवती चण्डिका की पावन तपस्थली एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर होने जा रही है। आगामी 30 अप्रैल से यहां 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद नौ दिवसीय महा बन्याथ का भव्य आयोजन किया जाएगा।

इस ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है तथा तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। महा बन्याथ आयोजन को सफल बनाने के लिए स्थानीय ग्रामवासियों, मंदिर समिति और क्षेत्रीय श्रद्धालुओं द्वारा व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

मंदिर परिसर की साफ-सफाई, मार्गों का सुंदरीकरण, श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आयोजन में दूर-दराज से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवती चण्डिका इन दिनों “घर दिवारा” के तहत क्षेत्र के गांव-गांव जाकर भक्तों की कुशलक्षेम पूछ रही हैं और उन्हें आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं।

इस दौरान देवी डोली के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। भक्तगण पूरे विधि-विधान के साथ देवी का स्वागत कर अपने घरों में सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

महा बन्याथ के दौरान विशेष पूजा-अर्चना, हवन-यज्ञ, जागरण और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। साथ ही क्षेत्रीय संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक भी इस आयोजन में देखने को मिलेगी।

तुंगेश्वर मन्दिर समिति अध्यक्ष मानवेन्द्र बर्त्वाल ने बताया कि यह महा बन्याथ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आयोजन में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया है। सचिव पूर्ण सिंह खत्री ने बताया कि 28 व 29 अप्रैल को अनेक धार्मिक, आध्यात्मिक व पौराणिक परम्पराओं का निर्वहन किया जायेगा तथा 30 अप्रैल से नौ दिवसीय महा बन्याथ का शुभारंभ होगा।

25 वर्षों बाद आयोजित हो रहा यह महा बन्याथ क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है। इसे लेकर लोगों में अपार श्रद्धा और उत्साह देखने को मिल रहा है। आयोजन के माध्यम से जहां एक ओर धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय एकता और सामाजिक समरसता का संदेश भी प्रसारित होगा।

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