बर्फबारी से प्रकृति में नव ऊर्जा, पर्यटन व्यवसाय को संजीवनी

लक्ष्मण सिंह नेगी/
ऊखीमठ। केदार घाटी के हिमालयी भूभाग सहित ऊंचाई वाले इलाको मे बर्फबारी होने से जहां प्रकृति में नव ऊर्जा का संचार हुआ है, वहीं पर्यटन व्यवसाय के लिए भी नई संभावनाएं उभरकर सामने आई हैं। लंबे समय से बर्फबारी का इंतजार कर रहे पर्यटन कारोबारियों और पर्यटकों के लिए यह बर्फबारी किसी सौगात से कम नहीं मानी जा रही है।
पहाड़ों की चोटियों पर जमी बर्फ, देवदार और बुरांश के जंगलों पर सफेद चादर तथा घाटियों में फैली ठंडक ने पूरे क्षेत्र की सुंदरता को और भी आकर्षक बना दिया है। बर्फबारी के बाद चोपता, तुंगनाथ, देवरियाताल, कार्तिक स्वामी , केदारघाटी सहित अन्य ऊंचाई वाले पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आमद बढ़ने की प्रबल संभावनाएं बन गई हैं। बर्फबारी के बाद पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में पर्यटन गतिविधियों में तेजी आएगी।
इससे स्थानीय लोगों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। दूसरी ओर, बर्फबारी के बाद तापमान में आई भारी गिरावट ने आम जनजीवन को खासा प्रभावित किया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शून्य से नीचे तापमान दर्ज किया जा रहा है, जबकि निचले इलाकों में भी कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है। ठंड बढ़ने से आम जनमानस को भारी परेशानियो का सामना करना पड़ रहा है। लोग दिन भर घरों में दुबकने को मजबूर हैं और बाजारों में भी सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है।
कुल मिलाकर, बर्फबारी ने जहां एक ओर पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य को नया जीवन दिया है । तुंगनाथ घाटी के व्यापारी प्रदीप बजवाल ने बताया कि क्षेत्र मे मौसम के अनुकूल बर्फबारी होने से व्यापारियो के चेहरे खिल उठे है तथा बर्फबारी के बाद स्थानीय पर्यटन व्यवसाय मे भारी इजाफा होने की सम्भावनाये बनी हुई है । मदमहेश्वर घाटी गैड बष्टी के प्रगतिशील काश्तकार बलवीर राणा ने बताया कि निचले भूभाग मे बारिश होने से प्रकृति मे नव ऊर्जा का संचार होने लगा है तथा बारिश काश्तकारो की फसलो के लिए वरदान साबित हुई है ।
कार्तिक स्वामी के व्यापारी प्रदीप नेगी ने बताया कि बर्फबारी के बाद प्राकृतिक सौन्दर्य पर चार चांद लगने शुरू हो गये है तथा पर्यटको की आवाजाही मे वृद्धि होने लगी है।



