देवभूमि की मर्यादा हेतु भैरव सेना का आर-पार का ऐलान
पंचगव्य आचमन अनिवार्य न होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

देहरादून। आज भैरव सेना संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री के नेतृत्व में संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को एक कड़ा ज्ञापन प्रेषित किया। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी चारधाम यात्रा से पूर्व तीर्थ क्षेत्रों में ‘पंचगव्य आचमन’ अनिवार्य करने और ‘तीर्थ सुधार नियमावली-1924’ लागू करने का शासनादेश जारी नहीं हुआ, तो संगठन स्वयं मोर्चे पर उतरकर शुद्धिकरण अभियान चलाएगा।


केंद्रीय अध्यक्ष संदीप खत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि संगठन द्वारा विगत 5 वर्षों से ग्रीष्मकालीन चारधाम तीर्थ यात्रा शुरू होने से ठीक दो सप्ताह पूर्व ‘सात दिवसीय पंचगव्य यात्रा’ का आयोजन किया जाता है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य तीर्थों की शुचिता बनाए रखना और सनातनियों को जाग्रत करना है। इस वर्ष भी यात्रा से पूर्व यदि सरकार ने ‘पंचगव्य आचमन’ और ‘तीर्थ सुधार नियमावली-1924’ पर ठोस शासनादेश जारी नहीं किया, तो यह अभियान जन-आंदोलन का रूप लेगा।
गढ़वाल संभाग अध्यक्ष गणेश जोशी ने कहा कि “गढ़वाल के चारों धाम और शक्तिपीठ हमारी आस्था के प्राण हैं। बाहरी और विधर्मी तत्वों की अनियंत्रित घुसपैठ ने देवभूमि की जनसांख्यिकीय मर्यादा को संकट में डाल दिया है। हम प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि यदि शासनादेश नहीं आया, तो गढ़वाल संभाग का प्रत्येक कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर शुद्धिकरण की कमान संभालेगा।
वहीं महानगर अध्यक्षा नीलम थापा के कथनानुसार “हिंदू समाज अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होगा। शहरों से लेकर पहाड़ों तक मातृशक्ति और युवा शक्ति एकजुट है। हम चाहते हैं कि तीर्थ क्षेत्रों के प्रवेश द्वारों पर प्रत्येक व्यक्ति को ‘पंचगव्य’ का आचमन करवाया जाए, ताकि केवल श्रद्धावान सनातनी ही प्रवेश कर सकें।”
जिला अध्यक्ष संजीव टांक एवं जिला संयोजिका नेहा भंडारी ने सामूहिक रूप से कहा कि “प्रशासन की निष्क्रियता के कारण तीर्थों की पवित्रता खतरे में है। जनवरी 2026 में गंगोत्री और हर की पैड़ी पर लिए गए निर्णयों को पूरे प्रदेश में विस्तार देना अनिवार्य है। यदि सरकार मौन रही, तो भैरव सेना के स्वयंसेवक स्वयं प्रवेश द्वारों पर मोर्चा संभालेंगे और इसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।
इस दौरान संगठन के दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे जिनमें उपरोक्त के अलावा अन्नू राजपूत, गीता नौटियाल, कल्पना भंडारी, रविन्द्र चौधरी, राजकुमार, राहुल सूद इत्यादि उपस्थित रहे।
प्रमुख मांगें एवं संकल्प:
‘पंचगव्य आचमन’ को समस्त तीर्थ प्रवेश द्वारों पर अनिवार्य करने हेतु अविलंब शासनादेश।
‘तीर्थ सुधार नियमावली-1924’ का पूर्णतः क्रियान्वयन।
तीर्थ क्षेत्रों में गैर-सनातनियों और संदिग्ध तत्वों की घुसपैठ पर पूर्ण प्रतिबंध।
“देवभूमि की मर्यादा से समझौता, अब और नहीं।”



