उत्तराखंडचारधाम यात्रा

वेदपाठियों की नियुक्ति और अधिकारियों के पदों पर तैनाती की राह मुश्किल भरी

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रजपाल बिष्ट, गोपेश्वर

देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी पद पर रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की तैनानी तो हो गई है किंतु उनके सामने कार्याधिकारी, उप मुख्य कार्याधिकारी तथा बदरीनाथ मंदिर में वेदपाठियों की नियुक्ति चुनौती बनी रहेगी। अस्थाई कर्मचारियों के वन टाइम सेटलमेंट का भी निस्तारण करना होगा।

दरअसल, शासन ने काफी सालों बाद बीकेटीसी के सीईओ पद की जिम्मेदारी आईएएस विशाल मिश्रा को सौंपी है। वह इस समय रूद्रप्रयाग के जिलाधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। बीकेटीसी के सीईओ की उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। बीकेटीसी के अधीन बदरीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना और भोग व्यवस्था के लिए वेदपाठियों का टोटा बना हुआ है। हालांकि इन पदों पर नियुक्ति के लिए 2018 से कवायद चल रही है। इसके बावजूद अभी तक वेदपाठियों के पदों पर सीधी भर्ती के जरिए नियुक्ति नहीं हो पाई है। इस कारण बदरीनाथ मंदिर में वेदपाठियों के पद खाली पड़ने से भोग तथा पूजा अर्चना का संकट खड़ा हो गया है। मौजूदा समय में धर्माधिकारी के पद पर भी प्रभारी के भरोसे काम चलाया जा रहा है। कहा जा सकता है कि पूजा अधिष्ठान में धर्माधिकारी तथा वेदपाठियों का टोटा होने से हालात चिंताजनक बनते जा रहे हैं।

पिछला और मौजूदा मंदिर समिति का बोर्ड विज्ञापन जारी करने के बावजूद नियुक्ति करने से पल्ला झाड़ता रहा है। ऐसा इसलिए कि आवेदकों अथवा चहेतों के भारी दबाव के चलते बोर्ड इस मामले में नियुक्ति करने से हाथ पीछे खींचता रहा। अब जबकि एक आईएएस अधिकारी को सीईओ की जिम्मेदारी मिली है तो माना जा रहा है कि जल्द ही इन खाली पड़े पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया संपादित हो जाएगी। इसके चलते बदरीनाथ धाम में पूजा अर्चना का संकट भी दूर हो जाएगा।

वैसे भी बदरीनाथ धाम के पूजा अधिष्ठान में धर्माधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद केदारनाथ अधिष्ठान के वेदपाठी को लाकर प्रभारी का दायित्व सौंपा गया। उनकी भी सेवानिवृत्ति हो गई और एक साल के सेवा विस्तार के बाद वे भी चलता कर दिए गए। इसके बाद केदारनाथ के ही स्वयंबर सेमवाल को बदरीनाथ मंदिर के धर्माधिकारी पद पर प्रभारी के तौर पर तैनाती दी गई। यह सब काम चलाऊ व्यवस्था के आधार पर की गई है। यहां तक कि वेदपाठी न होने के चलते रघुनाथ कीर्ति संस्कृत विद्यालय देवप्रयाग के एक शिक्षक को चारधाम यात्रा के दौरान वेदपाठी के कार्यों का निर्वहन करने के लिए बदरीनाथ में तैनात किया जाता रहा है। अब नए सीईओ को इस संकट को दूर करने के कदम बढ़ाने होंगे। ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में वेदपाठियों के बिना पूजा अर्चना का काम मुश्किल भरा हो जाएगा।

इसी तरह बीकेटीसी में बीते कई सालों से कार्याधिकारी का पद भी खाली चल रहा है। पदोन्नति के जरिए इस पद पर तैनाती होनी है। यह मामला भी लटका पड़ा है। उप मुख्य कार्याधिकारी पद भी खाली पड़े रहने के कारण मंदिर समिति की व्यवस्था संचालित करने में चुनौती आ खड़ी हो रही है। इन पदों पर तैनाती करने की चुनौती भी सीईओ के सामने है।

श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति में सैंकडों अस्थाई कर्मचारी कार्यरत हैं। इन्हें मानदेय भी उचित तौर पर नहीं मिल पा रहा है। नियमितिकरण की प्रक्रिया भी ठप पड़ी है। पिछले केदारनाथ उप चुनाव के दौरान यह मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में लाया गया। बताया जा रहा है कि केदारनाथ विधानसभा की भाजपा प्रत्याशी के तौर पर आशा नौटियाल ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। सीएम धामी ने अस्थाई कर्मचारियों के वन टाइम सेटलमेंट की मांग को पूरा करने का भरोसा दिया था। इस मामले की फाइल शासनस्तर पर चल रही है। अब नए सीईओ के सम्मुख वन टाइम सेटलमेंट के निस्तारित करने की भी चुनौती है। अब देखना यह है कि इस मोर्चे पर नए सीईओ किस तरह के कदमों के साथ आगे बढ़ते है। इस पर ही बीकेटीसी में खाली पड़े पदों और अस्थाई कर्मचारियों के भविष्य पर लगा ग्रहण दूर हो पाएगा।

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