उत्तराखंड

राहत : उत्तराखंड में नहीं होगी बिजली महंगी

UERC ने खारिज की 18.50% बढ़ोतरी की मांग,UERC ने ठुकराई UPCL की 18.50% बिजली टैरिफ बढ़ोतरी की मांग

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उत्तराखंड । प्रदेशवासियों के लिए अच्छी खबर है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली टैरिफ में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला लिया है। यानी आम उपभोक्ताओं, घरेलू, व्यावसायिक, औद्योगिक और अन्य श्रेणियों के बिजली बिलों में इस साल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL), उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) और पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) की संयुक्त मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

आयोग के अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी ने प्रेस वार्ता में इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं के हित को सर्वोपरि रखते हुए टैरिफ स्थिर रखने का निर्णय लिया गया है।

यह फैसला राज्य की अर्थव्यवस्था और आम जनता दोनों के लिए राहत भरा है, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जहां बिजली पहले से ही एक जरूरी लेकिन महंगी सुविधा मानी जाती है।

UPCL, UJVNL और PTCUL की 18.50% टैरिफ बढ़ोतरी की मांग क्यों की गई?

UPCL समेत अन्य बिजली कंपनियों ने नियामक आयोग के समक्ष वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) और टैरिफ निर्धारण की याचिका दाखिल की थी। इनमें ट्रू-अप ऑफ FY 2024-25 और APR ऑफ FY 2025-26 के आंकड़ों के आधार पर कुल 18.50 प्रतिशत औसत टैरिफ बढ़ोतरी की मांग रखी गई थी। UPCL अकेले ने औसतन 16.23 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग प्रतिशत शामिल थे।

कंपनियों ने राजस्व अंतर (revenue gap) को पूरा करने के लिए यह मांग की थी, जिसमें पावर खरीद लागत, ट्रांसमिशन चार्जेस, वितरण घाटा और अन्य परिचालन व्यय शामिल थे। लेकिन UERC ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने से इनकार कर दिया। आयोग ने कंपनियों की याचिका पर विस्तृत सुनवाई की और सार्वजनिक हित में टैरिफ स्थिर रखने का निर्णय लिया। यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत है जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं।

प्रीपेड मीटर उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त छूट, अन्य उपभोक्ताओं को भी लाभ

टैरिफ में कोई बढ़ोतरी न होने के अलावा आयोग ने कुछ सकारात्मक बदलाव भी किए हैं। प्रीपेड मीटर योजना का लाभ उठाने वाले उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार (energy charge) में 4 प्रतिशत की छूट मिलेगी, जबकि अन्य उपभोक्ताओं को 3 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह छूट बिजली बचत और समय पर भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए है।

आयोग ने UPCL को निर्देश दिया है कि राज्य में 10 सबसे ज्यादा घाटे वाले फीडर की पहचान के लिए एक विशेष समिति गठित की जाए। इन फीडरों पर घाटा कम करने, बिजली चोरी रोकने और वितरण दक्षता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। इससे लंबे समय में उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा और कम घाटे के कारण स्थिर टैरिफ मिलने की उम्मीद है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला? उत्तराखंड के उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा

उत्तराखंड में बिजली टैरिफ स्थिर रखने का फैसला कई मायनों में राहत भरा है

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए: औसत परिवारों का मासिक बिल बढ़ने से बचा रहेगा। पहाड़ी इलाकों में जहां आय के स्रोत सीमित हैं, यह फैसला सीधे तौर पर राहत देगा।

व्यावसायिक और छोटे उद्योगों के लिए: दुकानदार, होटल, छोटे कारखाने और सेवा क्षेत्र को अतिरिक्त खर्च से बचत होगी, जिससे व्यापार की लागत नियंत्रित रहेगी।

कृषि और ट्यूबवेल उपभोक्ताओं के लिए: किसानों को बिजली पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, जो राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद है।

औद्योगिक क्षेत्र के लिए: बड़े और छोटे उद्योगों में उत्पादन लागत स्थिर रहेगी, निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

आयोग के इस फैसले से राज्य सरकार की छवि भी मजबूत होगी क्योंकि बिजली महंगाई से बचाव उपभोक्ता संतोष बढ़ाता है।

UERC की भूमिका और भविष्य की दिशा

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग उपभोक्ता हितों की रक्षा करते हुए बिजली कंपनियों की वित्तीय व्यवहार्यता भी सुनिश्चित करता है। इस बार आयोग ने कंपनियों की मांग को खारिज कर साफ संदेश दिया कि बिना दक्षता सुधार के उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाला जाएगा।

आयोग ने UPCL को घाटे वाले फीडर सुधारने, वितरण घाटा कम करने (target 12.25% के आसपास) और स्मार्ट मीटरिंग व प्रीपेड सिस्टम को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। भविष्य में टाइम ऑफ डे टैरिफ, ग्रीन पावर टैरिफ जैसी योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

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