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शिक्षा जगत के ‘बाजीगर’ बने कालसी के सरकारी स्कूल

मसीहा बनकर उभरे खण्ड शिक्षा अधिकारी भुवनेश्वर प्रसाद जदली/

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दरवान सिंह गढ़िया /देहरादून।

सरकारी स्कूलों के बच्चों को दिखा रहे सुनहरे भविष्य का रास्ता

कालसी/देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों के बारे में अक्सर नकारात्मक खबरें सुनने को मिलती हैं, लेकिन जनपद देहरादून के विकासखंड कालसी ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसने पूरे प्रदेश के शिक्षा तंत्र को हक्का-बक्का कर दिया है। इसे किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जाएगा कि जहां निजी स्कूलों के बच्चे मोटी फीस देकर भी भटक रहे हैं, वहीं कालसी के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों के ‘नन्हे सितारों’ ने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल और हिम ज्योति विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं।

इस शैक्षिक क्रांति के पीछे कोई जादुई छड़ी नहीं, बल्कि खण्ड शिक्षा अधिकारी भुवनेश्वर प्रसाद जदली का वो फौलादी संकल्प और विजन है, जिसने सरकारी स्कूल के बच्चों को ‘अभाव’ से निकालकर ‘प्रभाव’ की ओर मोड़ दिया है। जदली केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन चुके हैं जो आर्थिक तंगी के कारण बड़े सपनों से डरते थे।

उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में जब भी शिक्षा की बात होगी, तो खण्ड शिक्षा अधिकारी भुवनेश्वर प्रसाद जदली का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।

वह केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि एक ऐसे ‘विजनरी लीडर’ हैं, जिन्होंने अपनी सरकारी सेवा के प्रथम दिन से ही शिक्षा की परिभाषा बदल दी है। वर्ष 2015 में टिहरी गढ़वाल के भिलंगना ब्लॉक से शुरू हुआ उनका यह ‘शिक्षा महायज्ञ’ आज कालसी की धरती पर अपनी सफलता की चरम सीमा पर है।

जदली की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे ‘एसी कमरों’ के बजाय ‘क्लासरूम’ में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कालसी विकासखंड के हर राजकीय विद्यालय में एक ऐसा माहौल तैयार कर दिया है, जहां आज गरीब से गरीब बच्चा भी सैनिक स्कूल घोड़ाखाल, हिम ज्योति, जवाहर नवोदय और राजीव नवोदय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जाने का सपना ही नहीं देखता, बल्कि उसे हकीकत में बदलता है।अब तक 1500 से अधिक छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाकर उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना, उनके अटूट संकल्प का परिणाम है।

भिलंगना से कालसी तक… सफलता का ‘जदली मॉडल’

भुवनेश्वर प्रसाद जदली ने 2015 में भिलंगना टिहरी से अपनी सेवा शुरू की थी। वहां उन्होंने 500 से अधिक बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल कराकर अपना लोहा मनवाया था। आज कालसी में उनका यह अभियान एक ‘महायज्ञ’ बन चुका है। अब तक वे 1500 से अधिक छात्र-छात्राओं को सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय, हिम ज्योति, राजीव नवोदय और छात्रवृत्ति परीक्षाओं की दहलीज पार करवा चुके हैं।

शिक्षक खबर विशेष जदली की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे सरकारी योजनाओं को फाइलों से निकालकर सीधे बच्चों की डेस्क तक पहुंचाते हैं। उन्होंने विशेषज्ञों और समर्पित अध्यापकों की एक ऐसी ‘एक्सपर्ट टीम’ तैयार की है, जो प्राइमरी स्तर से ही बच्चों को कोचिंग और गाइडेंस देती है।

सारा श्रेय ‘टीम’ को: विनम्रता की मिसाल

इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद जदली की सादगी देखते ही बनती है। वे अपनी हर जीत का श्रेय अपनी अध्यापक टीम तनुजा घिड़ियाल, रीटा यादव, तृप्ति देवरानी, कपिल उनियाल और समस्त कालसी के शिक्षकों को देते हैं। उनके इसी बड़प्पन ने उन्हें उत्तराखंड शिक्षा विभाग का सबसे लोकप्रिय और सम्मानित अधिकारी बना दिया है।

निष्कर्ष: भुवनेश्वर प्रसाद जदली जैसे अधिकारी शिक्षा विभाग की असली पूँजी हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों की खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस लौटाया है और हजारों परिवारों के बुझते हुए चिरागों को शिक्षा की लौ से रौशन किया है।     

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