कोटद्वार

जीएमओयू’ एक ऐतिहासिक विरासत पतन की ओर

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विजय भट्ट, वरिष्ठ पत्रकार देहरादून

गढ़वाल मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड जीएमओयू का नाम सुनते ही गढ़वाल की पहाड़ियों में दौड़ती बसों, घाटियों में गूंजते हॉर्न और सैकड़ों गांवों के जीवन में आए संजीवनी परिवर्तन की तस्वीर सामने आती है।

1943 में स्थापित यह संस्था केवल एक निजी परिवहन कंपनी नहीं, बल्कि गढ़वाल क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की रीढ़ रही है। दशकों तक जीएमओयू ने उन दूर-दराज के क्षेत्रों को जोड़ा, जहां सरकारी परिवहन की पहुँच सीमित या न के बराबर थी।

गढ़वाल की पहाड़ी इलाकों में जीएमओयू की बसें जीवनदायिनी थीं, और इसे एशिया की सबसे बड़ी निजी परिवहन कंपनियों में गिना जाता था। लेकिन दुर्भाग्यवश, समय के साथ कुप्रबंधन, आंतरिक विवाद और भ्रष्टाचार ने इस गौरवशाली संस्था को कमजोर कर दिया।

हाल ही में सामने आए 2.5 करोड़ रुपये के घपले ने जीएमओयू की विश्वसनीयता पर गहरा असर डाला है। इस मामले में कंपनी के पूर्व अध्यक्ष सहित नौ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है।

इस आर्थिक अनियमितता ने जीएमओयू की वित्तीय स्थिति को और अधिक खराब कर दिया है, जिसका सीधा असर सैकड़ों कर्मचारियों और लाखों यात्रियों के जीवन पर पड़ा है, जो इस सेवा पर पूरी तरह निर्भर थे।

आज जीएमओयू बंद होने के कगार पर है, कई रूट बंद हो चुके हैं और बसें जंग खा रही हैं। यह केवल एक कंपनी की समस्या नहीं, बल्कि गढ़वाल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और जनजीवन के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।

ऐसे में राज्य सरकार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार को तत्काल प्रभाव से जीएमओयू के पुनरुद्धार के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाने होंगे। साथ ही, समाज और स्थानीय प्रतिनिधियों को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी, क्योंकि जीएमओयू केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि गढ़वाल की सांस्कृतिक और आर्थिक आत्मा का प्रतीक है।

संस्थान की सफलता मजबूत प्रबंधन, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना पर निर्भर करती है। यदि समय रहते सुधार न किए गए, तो जीएमओयू जैसी ऐतिहासिक संस्था इतिहास के पन्नों में समा जाएगी। लेकिन अभी भी मौका है कि जीएमओयू को पुनर्जीवित कर गढ़वाल के पहाड़ों की जीवनरेखा के रूप में स्थापित किया जाए।

बस ज़रूरत है सही नीयत और स्पष्ट नीति की। कोटद्वार में जीएमओयू का मुख्यालय है, इसके कर्मचारियों की ओर से ही इसको नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। जिसमें ढाई करोड़ रुपये के घपले की बात सामने आई है।

Sangeeta Butola

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