
देहरादून।कैबिनेट विस्तार के बाद उत्तराखंड सरकार की पहली मंत्रिमंडल बैठक आज सचिवालय में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की। इस बैठक की खास बात यह रही कि हाल ही में शामिल किए गए 5 नए मंत्रियों ने पहली बार कैबिनेट में हिस्सा लिया। बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और कर्मचारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसके बाद कुल 16 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।


सबसे पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े प्रस्ताव में 1 करोड़ रुपये से अधिक की कंसल्टेंसी सेवाओं को स्वीकृति दी गई, जिससे राज्य में सड़क और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
न्याय विभाग के कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने उन्हें नॉमिनल ब्याज दर पर अधिकतम 10 लाख रुपये तक का सॉफ्ट लोन देने की मंजूरी दी है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी।
वन विभाग में प्रशासनिक पदों के लिए न्यूनतम सेवा अवधि को 25 वर्ष से घटाकर 22 वर्ष कर दिया गया है। इस निर्णय से विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया तेज होगी और अधिक अधिकारियों को नेतृत्व के अवसर मिल सकेंगे।
ऊर्जा विभाग के तहत सब्सिडी को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया गया कि इसका लाभ 31 मार्च 2025 तक ही सीमित रहेगा। इसके बाद नई नीति के तहत बदलाव संभव हैं।
गृह विभाग में होमगार्ड्स के लिए नई नियमावली तैयार करने को मंजूरी दी गई है, जिससे उनकी सेवाओं और सुविधाओं में सुधार होगा। साथ ही भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद पुलिस और संबंधित विभागों के प्रशिक्षण के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति का भी फैसला लिया गया है।
स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने पूर्व सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए योजनाओं में 10 प्रतिशत लक्ष्य आरक्षित करने के साथ 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इससे इन वर्गों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के तहत गेहूं और धान की खरीद पर केंद्र सरकार के बराबर मंडी शुल्क देने का फैसला लिया गया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होने की संभावना है।
इसके अलावा कैबिनेट ने पंचम विधानसभा सत्र आहूत करने को भी मंजूरी प्रदान की, जिससे आने वाले समय में राज्य के महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए जा सकेंगे।
कैबिनेट विस्तार के बाद सरकार की यह पहली बैठक कई मायनों में अहम रही। एक तरफ जहां कर्मचारियों और किसानों के हित में फैसले लिए गए, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक सुधार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर भी फोकस किया गया। सरकार के इन 16 फैसलों को आगामी नीतिगत दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।



