बाजावाला पुल के नीचे अवैध खनन पर भड़के ग्रामीण, पुल की सुरक्षा पर मंडराया खतरा
टौंस और नून नदी में दिन-रात खनन का आरोप, ग्रामीणों के हंगामे के बाद रास्ता खोदकर किया गया बंद

विनोद जोशी कौलागढ़/ देहरादून। बाजावाला पुल के नीचे कथित अवैध खनन को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मसंदावाला, बाजावाला और कौलागढ़ के निवासियों ने खनन गतिविधियों पर नाराजगी जताते हुए पुल की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
सामाजिक कार्यकर्ता विनोद जोशी के अनुसार, टौंस और नून नदियों में दिन-रात अवैध खनन किया जा रहा है। आरोप है कि अब खनन माफिया बाजावाला पुल के नीचे भी खनन करने लगे हैं। ग्रामीणों के हंगामे के बाद खनन विभाग की अनुबंधित कंपनी KRBMLLP की टीम मौके पर पहुंची और नदी में वाहनों के प्रवेश का रास्ता खाई खोदकर बंद कराया।

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से खनन करने वालों के हौसले बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि बरसात के दौरान नदी में तेज बहाव के कारण पुल के पिलरों के आसपास की मिट्टी पहले ही हट चुकी है। ऐसे में पुल के नीचे खनन करना इसकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
घंटाघर से पांवटा साहिब को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात का दबाव भी काफी अधिक रहता है। यदि पुल को नुकसान पहुंचता है, तो हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और खनन विभाग से मांग की है कि अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और पुल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस दौरान वार्ड सदस्य प्रीति थापा, पूर्व उपप्रधान चंद्रमणि पेटवाल, पूर्व प्रधान मोहन ठाकुर, उमाशंकर बहुगुणा, सरिता कश्यप, सविता, मंजू नेगी, विजेंद्र असवाल, दीपक थापा, ममता थापा और नीरज थापा सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे से पहले जागेगा, या ग्रामीणों की शिकायतें यूं ही अनसुनी होती रहेंगी?



