
लक्ष्मण सिंह नेगी/उखीमठ। भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में नवनिर्मित भवन में पंचकेदार के शिवलिंगों की विधिवत प्रति स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच सम्पन्न हो गई। इस पावन अवसर पर रावल भीमाशंकर लिंग, विद्वान आचार्यों एवं हक-हकूकधारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
धार्मिक परंपराओं के अनुरूप सुबह से ही मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और यज्ञ का आयोजन किया गया। वेद ऋचाओं के उच्चारण के साथ पंचकेदार शिवलिंगों को विधिपूर्वक नए भवन में प्रतिष्ठापित किये गये। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी।
रावल भीमाशंकर लिंग ने बताया कि पंचकेदार परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है और इन शिवलिंगों की स्थापना से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी सुदृढ़ करने वाला है।
विद्वान आचार्यों ने वैदिक विधि-विधान से पूजन सम्पन्न कराते हुए बताया कि शास्त्रों के अनुसार प्रतिस्थापित किए गए शिवलिंग क्षेत्र में सुख-समृद्धि और शांति का संदेश देते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में सहयोग की अपील की।
हक-हकूकधारियों ने भी इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि लंबे समय से इस नवनिर्मित भवन में शिवलिंग स्थापना की प्रतीक्षा थी, जो अब पूर्ण हो चुकी है। इससे आने वाले समय में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
स्थानीय जनता में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। लोगों ने इसे अपनी आस्था और परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण क्षण बताया। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
पंचकेदार शिवलिंगों की इस विधिवत प्रति स्थापना के साथ ही ओंकारेश्वर मंदिर में धार्मिक गतिविधियों का दायरा और अधिक विस्तृत हो गया है, जिससे क्षेत्र की पहचान एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में और सुदृढ़ होगी।
ओंकारेश्वर मंदिर प्रभारी विजेन्द्र बिष्ट ने बताया कि ओंकारेश्वर मन्दिर में पंच केदार शिव लिंग युगों से स्थापित थे मगर पुराने भवन की स्थिति जीर्ण – शीर्ण होने के कारण पंच केदार शिव लिंगो को नये भवन में प्रतिस्थापित किये गये है।
इस मौके पर पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, मन्दिर समिति सदस्य प्रह्लाद पुष्वाण, प्रधान पुजारी, शिव शंकर लिंग, बागेश लिंग, शिव लिंग, वेदपाठी विश्व मोहन जमलोकी, देवी प्रसाद तिवारी, सरिता बुटोला, महादेव सिंह, पूनम राणा सहित विद्वान आचार्य व पंचगाई के हक – हकूकधारी मौजूद थे।



