ऊखीमठ में अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं का प्रदर्शन
तहसील प्रशासन के माध्यम से जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

लक्ष्मण सिंह नेगी/ऊखीमठ । ऊखीमठ मुख्य बाजार सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ महिलाओं एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने मुख्य बाजार में रैली निकालकर स्थानीय प्रशासन व आबकारी विभाग के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। रैली में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अवैध शराब की बिक्री से क्षेत्र का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। रैली गैस गोदाम से मुख्य बाजार के विभिन्न मार्गों से होते हुए तहसील परिसर पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने तहसील प्रशासन के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन प्रेषित किया।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से अवैध शराब के कारोबार पर सख्त कार्रवाई करने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने तथा क्षेत्र में नियमित छापेमारी अभियान चलाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद भी प्रशासन और आबकारी विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे शराब माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। महिलाओं ने कहा कि अवैध शराब के कारण घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट और सामाजिक बुराइयों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे सबसे अधिक प्रभावित महिलाएं और बच्चे हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से जनहित में तत्काल कठोर कदम उठाने की अपील की।
इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी एकजुटता दिखाते हुए कहा कि समाज को नशामुक्त बनाने के लिए जनजागरूकता के साथ-साथ प्रशासनिक सख्ती भी बेहद जरूरी है। उन्होंने अवैध शराब के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने का आह्वान किया।
इस मौके पर केदार सभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विजय राणा, कनिष्ठ प्रमुख प्रदीप त्रिवेदी , उदयपुर वार्ड सभासद श्रीमती सरला रावत , प्रधान सुलेखा देवी, दलवीर रावत , सरिता देवी, आयुष नौटियाल, विराट सौरभ भट्ट, सोहन , देवेन्द्र प्रसाद, रश्मि , अंजना देवी, चन्दना देवी, सरस्वती देवी, संगीता देवी, नेहा देवी, कविता देवी, आशा देवी, बबीता देवी सरोज देवी, रजनी देवी, सुभद्रा देवी सहित विभिन्न गांवों की महिलाएं व सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे।



