डीएम सविन बंसल के समर्थन में उतरी 25 से ज्यादा संस्थाएं
दून आया सविन बंसल के पक्ष में , डीएम को हटाया तो होगा बड़ा आंदोलन

देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल को हटाए जाने की चर्चाओं के बीच दून की 25 से अधिक सामाजिक संस्थाओं और संयुक्त नागरिक संगठन के प्रतिनिधियों ने खुलकर उनके समर्थन में आवाज बुलंद की है। विभिन्न वक्ताओं ने बंसल को ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जनसेवा का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका कार्यकाल जनहित के लिए उदाहरण बन चुका है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि डीएम बंसल ने जनता दरबार के माध्यम से आमजन खासकर वरिष्ठ नागरिकों और असहाय लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया है। आपदा के समय दिन-रात राहत कार्यों में जुटकर उन्होंने संवेदनशील प्रशासन की मिसाल पेश की। नरेशचंद्र कुलाश्री ने उनके कार्यों को जनाकांक्षाओं का प्रतीक बताते हुए ऐसे अधिकारी को राष्ट्रीय सम्मान दिए जाने की मांग की।
हरेंद्र सिंह रावत, खुशबीर सिंह, जसवीर सिंह रेनोत्रा और अवधेश शर्मा समेत कई वक्ताओं ने कहा कि बंसल एक न्यायप्रिय, विनम्र और सक्षम प्रशासक हैं, जिनकी कार्यशैली ने आम आदमी और प्रशासन के बीच की दूरी को कम किया है। जीएस बिष्ट ने उन्हें मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण अधिकारी बताया, जबकि ताराचंद गुप्ता ने कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और लगन से कर नौकरशाही के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है।
डॉ. महावीर सिंह बिष्ट, मेजर आरएस कैंथुरा और देवेंद्र पाल मोंटी ने अधिवक्ताओं द्वारा बनाए जा रहे दबाव को अनुचित बताते हुए कहा कि जनहित में कार्य करने वाले अधिकारी के खिलाफ इस प्रकार का विरोध दुर्भाग्यपूर्ण है। आरएस धुनता ने कहा कि बंसल जैसे कर्मठ अधिकारी का मिलना दून की जनता के लिए सौभाग्य है, जो किसी दबाव में आए बिना निष्पक्ष निर्णय लेते हैं।
डॉ. महावीर बर्थवाल और डॉ. शैलेंद्र कौशिक ने कहा कि उनके नेतृत्व में प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की नई परंपरा स्थापित हुई है, जिससे आमजन का विश्वास मजबूत हुआ है। सुशील सैनी ने उन्हें राज्य गठन के बाद सबसे जनसंवेदनशील जिलाधिकारी बताया, जबकि उमेश्वर सिंह रावत ने कहा कि उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है।
डॉ. अजीत गैरोला और डॉ. टीएन जौहर ने चेताया कि यदि ऐसे ईमानदार अधिकारियों को स्वार्थी तत्वों के दबाव में हटाया गया, तो भविष्य में प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित होगी। आंदोलनकारी केशव उनियाल और मधु त्यागी ने भी बंसल के समर्थन में संगठन की एकजुटता जताई।
वक्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि वर्षों से बैंकों में निष्क्रिय पड़े फंड को जनहित में उपयोग करना एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय रहा है। साथ ही, कानून-व्यवस्था को सख्ती से लागू कर उन्होंने जनता और प्रशासन के बीच मजबूत सेतु का कार्य किया है।
संयुक्त नागरिक संगठन के पदाधिकारियों सुशील त्यागी, प्रदीप कुकरेती और जगमोहन मेहंदीरत्ता ने स्पष्ट किया कि दून की जागरूक जनता ऐसे जनहितैषी अधिकारी को हटाने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगी और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी रहेगी।



