सड़क चौड़ीकरण मेें एफआरआई बन रहा बाधा

कौलागढ़/देहरादून। सामाजिक कार्यकर्ता विनोद जोशी ने अवगत करवाया कि कौलागढ बाजावाला मसंदावाला मार्ग में जनता आये दिन जाम से जुझती रहती है जिस वजह से इस मार्ग के चौड़ीकरण की मांग की लंबे समय से उठ रही है।
यह मार्ग आसपास के गावों कौलागढ, बाजावाला, मसंदावाला, जामुनवाला,आमवाला, फुलससनी सहित पछवादून के बडे हिस्से को जोडता है लेकिन एफआरआई प्रशासन आरक्षित वन क्षेत्र और एफआरआई परिसर की सुरक्षा का बहाना बनाकर इस मार्ग के चौड़ीकरण मेें बाधक बना हुआ है।

कुछ वर्ष पूर्व जब प्रेमनगर में चौड़ीकरण के लिए दुकानें और मकान तोड़े गये थे और मार्ग बंद था तब से इस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है जब से नंदा की चौकी वाला पुल टुटा है तब से इस मार्ग पर जाम की स्थिति और ज्यादा बढ़ गयी है ।
पिछ्ले वर्ष दिसंबर मेें टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने लोकसभा में नियम 377 के अन्तर्गत इस मार्ग के चौड़ीकरण का मामला उठाया था लेकिन भारतीय वानिकी अनुसंधान संस्थान एवं शिक्षा परिषद की आख्या के आधार वन पर्यावरण मंत्रालय ने भी पर्यावरणीय संवेदनशीलता और सुरक्षा की दृष्टि से एफआरआई की भूमि से चौड़ीकरण में असमर्थता व्यक्त की है।
दरअसल चौड़ीकरण के लिए एफआरआई की कुछ भूमि का अधिग्रहण होना है भारतीय वानिकी अनुसंधान संस्थान एवं शिक्षा परिषद की आख्यानुसार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने सांसद द्वारा लोकसभा में उठाये गये सवाल का जवाब दिया कि ये आरक्षित वन क्षेत्र है यह क्षेत्र मध्यम से सघन वन का हिस्सा है ।
जिसमें तेंदुए सहित अनेक सरंक्षित वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास है परिसर के भीतर से चौड़ीकरण होने से आवासीय परिसर और वन संपदा को क्षति पहुंचने की संभावना है जबकि जहां से सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि चाहिए वह कौलागढ के पास वाली बाउंड्रीवाल से लगी हुई है।
जहां से आवासीय परिसर बहुत दूर है न वहां तेंदुए है और न ही संरक्षित वन्य जीवों का आवास जबसे इस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव ज्यादा बढा है तबसे एफआरआई परिसर से तेंदुए और हिसंक जीव गायब हो गये हैं वैसे भी कौलागढ से लगते एफआरआई परिसर में कभी भी वन्यजीवों का खतरा नही रहा है।
एफआरआई प्रशासन द्वारा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को दी गयी आख्या केवल मार्ग चौड़ीकरण में बाधक है एफआरआई प्रशासन अपने हिसाब से नियम बनाता रहता है अंग्रेजो से हुए करार के अनुसार चरखी गेट हमेशा कौलागढ वासियों के खुला रहेगा कौलागढ निवासियों के एफआरआई परिसर से आवागमन नि:शुल्क रहेगा।
लेकिन एफआरआई प्रशासन जब मन चाहा चरखी गेट को बंद कर देता है जिससे कौलागढ वासियों के साथ साथ स्कूली छात्र को बहुत ज्यादा परेशानी होती है चरखी गेट बंद होने से स्कूली छात्रों को गेट पर चढ़कर स्कूल जाना पडता है जबकि गेट पर नुकीले सरिया लगे हुए हैं एफआरआई प्रशासन अपनी जिद छोडे मार्ग के चौड़ीकरण में बाधक न बने ।



