
मुकेश सेमवाल/श्रीनगर गढ़वाल।
13 अगस्त, 2026 को नाजुक हिमालयी क्षेत्र एक और मानव-निर्मित त्रासदी का गवाह बना। चमोली जिले के पिपलकोटी के निकट स्थित THDC विष्णुगाड-पिपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टेल-रेस सुरंग में अचानक भारी मात्रा में मिट्टी, पानी और मलबा घुस आया, जिससे सुरंग का एक हिस्सा ढह गया। राहत एवं बचाव दलों ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए 14 घायल मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन इस हादसे में 7 निर्दोष मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) पीड़ितों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है और इन मौतों के लिए कॉर्पोरेट लालच और सरकारी लापरवाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराता है।
उत्तराखंड में ऐसे घातक हादसे अब आम बात हो गए हैं:
फरवरी 2021 (ऋषिगंगा-धौलीगंगा बाढ़): 204 से अधिक लोगों की जान गई।
नवंबर 2023 (सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग हादसा): 41 मजदूर 16 दिनों तक फंसे रहे।
अगस्त 2026 (पिपलकोटी सुरंग आपदा): 7 मृत, 14 घायल।
ये प्राकृतिक आपदाएं नहीं हैं — ये औद्योगिक हत्याएं हैं। कॉर्पोरेट मुनाफे को अधिकतम करने के लिए बुनियादी जीवन-सुरक्षा ढांचे और अनिवार्य आपातकालीन निकास मार्गों की नियमित रूप से अनदेखी की जाती है। ऑक्सीजन, पानी, भोजन और संचार के लिए पहले से लगाई जाने वाली आपातकालीन नलिकाएं — जो अन्यत्र मानक सुरक्षा सुविधाएं हैं — यहां पूरी तरह से नदारद हैं। इसके अलावा, कठोर भूवैज्ञानिक मानचित्रण, उच्च-रिज़ॉल्यूशन ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR), भूकंपीय टोमोग्राफी और दिशात्मक कोर ड्रिलिंग को पर्यावरण मंजूरी बोर्डों को गुमराह करने के लिए महज कागजी खानापूर्ति माना जाता है। मंजूरी मिलने के बाद, तीव्र कॉर्पोरेट शोषण के पक्ष में सभी वैज्ञानिक प्रोटोकॉल त्याग दिए जाते हैं।
SUCI (कम्युनिस्ट) दृढ़ता से यह दावा करता है कि पूंजीवादी आर्थिक व्यवस्था की सेवा में, सरकार जानबूझकर नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर रही है और मजदूरों के जीवन को डिस्पोजेबल (उपयोग कर फेंक देने योग्य) मान रही है। वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों की अनदेखी की गई चेतावनियों की कीमत खून से चुकाई जा रही है।
हम भारत के नागरिकों, कार्यकर्ताओं और मेहनतकश वर्ग से हिमालय क्षेत्र के इस आपराधिक विनाश के खिलाफ एकजुट होकर प्रतिरोध करने का आह्वान करते हैं। कॉर्पोरेट मुनाफे के लिए मानव जीवन और पारिस्थितिक स्थिरता की बलि देना बंद करो!



