उखीमठरूद्रप्रयाग

मद्महेश्वर घाटी में चीड़ के वृक्षों का अवैध पातन, वन विभाग हरकत में

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लक्ष्मण सिंह नेगी/ऊखीमठ। 

मद्महेश्वर घाटी स्थित राजकीय इण्टर कालेज राउलैक परिसर सहित मोटर मार्ग के एक हिस्से में चीड़ के हरे-भरे वृक्षों के अवैध पातन का मामला प्रकाश में आने से क्षेत्र में हड़कम्प मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग रूद्रप्रयाग की गुप्तकाशी यूनिट टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार राजकीय इण्टर कालेज राऊंलैक परिसर और उससे सटे ऊखीमठ – रासी मोटर मार्ग के किनारे खड़े कई चीड़ के पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया गया। इन वृक्षों का पातन बिना किसी वैधानिक अनुमति के किया गया है, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि दिनदहाड़े इस प्रकार पेड़ों का कटान होना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संबंधित क्षेत्र में वृक्षों के कटान की किसी प्रकार की अनुमति जारी नहीं की गई है। विभाग के अनुसार यह पूरी तरह अवैध कृत्य है और इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है।

घटना के बाद वन विभाग भी सवालों के घेरे में आ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही के चलते ही इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर निगरानी की जाती, तो इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को रोका जा सकता था।

पर्यावरणविदों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि चीड़ जैसे बहुमूल्य और पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण वृक्षों का इस तरह कटान न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को भी प्रभावित करता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

वन विभाग के उच्चाधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। घटना ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में वन संपदा की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन व वन विभाग इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करता है तथा दोषियों को कब तक कानून के दायरे में लाया जाता है। इस मामले में वन विभाग के वन दरोगा अभिषेक नेगी का कहना है कि टीम मौके के लिए रवाना हो गई है तथा दोषियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जायेगी।

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