मद्महेश्वर धाम के कपाट खोलने की तिथि में बदलाव की मांग, प्रशासन को भेजा ज्ञापन

लक्ष्मण सिंह नेगी/ऊखीमठ । पंच कारबारियान हक-हकूकधारी समिति, श्री मद्महेश्वर मंदिर मद्महेश्वर धाम गौण्डार द्वारा जिलाधिकारी / बद्री केदार मन्दिर समिति मुख्य कार्याधिकारी को ज्ञापन प्रेषित कर द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट खोलने की तिथि में परिवर्तन की मांग उठाई गई है।
समिति ने मांग की है कि भविष्य में मद्महेश्वर धाम के कपाट केदारनाथ एवं तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथियों के आसपास ही निर्धारित किए जाएं, जिससे श्रद्धालुओं को पंचकेदार यात्रा में सुगमता मिल सके। समिति के शिवानन्द पंवार ने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान में मद्महेश्वर धाम के कपाट खुलने की तिथि अन्य धामों की तुलना में एक माह बाद होने के कारण श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।
यदि केदारनाथ व तुंगनाथ धाम के निकट तिथियों में ही द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम के कपाट खोले जाते हैं तो श्रद्धालु एक ही यात्रा क्रम में तीनों धामों के दर्शन कर सकेंगे, जिससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। समिति के संरक्षक फते सिंह पंवार का कहना है कि पंचकेदार यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस यात्रा को पूर्ण करने की इच्छा रखते हैं।
अलग-अलग तिथियों के कारण कई बार यात्रियों को पुनः यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और आर्थिक भार बढ़ता है। इस समस्या के समाधान हेतु समिति ने प्रशासन व बद्री केदार मन्दिर समिति से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई है । सचिव वीरेन्द्र सिंह पंवार का कहना है कि कपाट खुलने की तिथियों में समन्वय स्थापित होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
पर्यटन सीजन में एक साथ अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से क्षेत्रीय व्यापार, आवास, परिवहन एवं अन्य सेवाओं को लाभ मिलेगा।
समिति कोषाध्यक्ष दिलवर से पंवार ने जिलाधिकारी / मुख्यकार्यकारी से अनुरोध किया है कि इस विषय पर संबंधित विभागों, मंदिर समिति एवं धार्मिक विद्वानों के साथ समन्वय स्थापित कर उचित निर्णय लिया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। वन पंचायत सरपंच गौण्डार जसपाल सिंह पंवार ने जिलाधिकारी / मुख्यकार्यकारी से भविष्य में सकारात्मक निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे न केवल धार्मिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि मद्महेश्वर घाटी का समग्र विकास भी संभव हो सकेगा।



