रूद्रप्रयाग

चोपता–तुंगनाथ पैदल मार्ग पर समस्याओं का अम्बार,तीर्थयात्री

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लक्ष्मण सिंह नेगी/ऊखीमठ। 

चोपता से तुंगनाथ मंदिर तक जाने वाले प्रसिद्ध पैदल मार्ग पर इन दिनों समस्याओं का अंबार लग गया है। प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था के इस प्रमुख पैदल मार्ग पर बुनियादी सुविधाओं की कमी से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या पैदल मार्ग पर शौचालयों और प्रतिक्षालयों के अभाव की है।

हजारों की संख्या में प्रतिदिन पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं न होने से उन्हें खुले में शौच करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे न केवल असुविधा बढ़ रही है बल्कि पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

इसके साथ ही क्षेत्र में पेयजल संकट भी गहराने लगा है। कई स्थानों पर जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं, जिससे यात्रियों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती भीड़ और जल स्रोतों के संरक्षण की अनदेखी के कारण स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।

चोपता–तुंगनाथ पैदल मार्ग के आसपास फैले खूबसूरत बुग्याल, जो हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, अब मानव गतिविधियों के दबाव में खतरे में आ गए हैं। अनियंत्रित आवागमन, कूड़ा-कचरा और चराई के बढ़ते दबाव से इन नाजुक घास के मैदानों का अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है।

पर्यावरण प्रेमी चन्द्र सिंह नेगी का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इन बुग्यालों की प्राकृतिक संरचना को स्थायी नुकसान हो सकता है। उन्होंने सीमित संख्या में पर्यटकों की अनुमति, कचरा प्रबंधन और सख्त निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पैदल मार्ग पर शीघ्र ही शौचालय, प्रतिक्षालय और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए।

साथ ही बुग्यालों के संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाकर उसका सख्ती से पालन कराया जाए। अनिल जिरवाण का कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो न केवल तीर्थयात्रियों की आस्था को ठेस पहुंचेगी, बल्कि उत्तराखंड की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर भी खतरे में पड़ सकती है।

केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग ऊखीमठ / गुप्तकाशी रेंज अधिकारी विमल कुमार भट्ट ने बताया कि चोपता – तुंगनाथ – चन्द्र शिला पैदल ट्रैक के दोनों तरफ फैले सुरम्य मखमली बुग्यालों के संरक्षण व संवर्धन के लिए विभाग निरन्तर प्रयासरत हैं तथा प्रतिबंधित क्षेत्रो में आवागमन करने वाले ४० पर्यटकों का वन अधिनियम के तहत जुर्माना वसूला गया है।

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